पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं? टाइगर सफारी, सही समय और ट्रिप प्लान की पूरी जानकारी

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  अगर आप पहली बार रणथंभौर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल होंगे—रणथंभौर कब जाना चाहिए, कितने दिन रुकना सही रहेगा, टाइगर सफारी कैसे बुक करें, एक सफारी काफी है या दो करनी चाहिए और सबसे बड़ा सवाल, क्या रणथंभौर में बाघ जरूर दिखाई देता है? इन सवालों के जवाब जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि रणथंभौर की यात्रा किसी सामान्य sightseeing trip जैसी नहीं है। यहां आपका अनुभव मौसम, सफारी के समय, जंगल की परिस्थितियों और थोड़े से भाग्य पर भी निर्भर करता है। मेरी नजर में रणथंभौर को सिर्फ “बाघ देखने की जगह” समझना सबसे बड़ी गलती होगी। सवाई माधोपुर के पास स्थित यह इलाका जंगल, झीलों, पहाड़ियों, वन्यजीवों और ऐतिहासिक रणथंभौर किले का ऐसा मेल है, जहां एक ही यात्रा में आपको प्रकृति और इतिहास दोनों को करीब से देखने का मौका मिलता है। अगर आप अपनी पहली यात्रा को थोड़ा सोच-समझकर प्लान करते हैं, तो सिर्फ एक सफारी के बजाय पूरा रणथंभौर अनुभव करना ज्यादा यादगार हो सकता है। पहली बार रणथंभौर जाने के लिए कितने दिन काफी हैं? अगर आप पहली बार रणथंभौर जा रहे हैं, तो 2 रात और 3 दिन का trip एक अच्छा विकल्...

हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है

 


हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मज़ाक (pranks) करते हैं और एक-दूसरे को 'बेवकूफ' बनाकर आनंद लेते हैं।

इसे मनाने के पीछे सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक कारण नीचे दिए गए हैं:
  • कैलेंडर में बदलाव (फ्रांस): 16वीं सदी (1564/1582) में फ्रांस ने जूलियन कैलेंडर की जगह ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया। इसके बाद नया साल 1 अप्रैल के बजाय 1 जनवरी से शुरू होने लगा। उस समय सूचना के अभाव में कई लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए उन्हें "अप्रैल फूल" कहा जाने लगा।
  • हिलारिया उत्सव (रोम): प्राचीन रोम में मार्च के अंत में 'हिलारिया' नाम का त्यौहार मनाया जाता था। इसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे की नकल उतारते थे और हंसी-मज़ाक करते थे, जिसे अप्रैल फूल की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
  • अप्रैल फिश (April Fish): फ्रांस में जिस व्यक्ति को मूर्ख बनाया जाता है, उसे 'पोइज़न द एप्रिल' (अप्रैल फिश) कहा जाता है। बच्चे अक्सर लोगों की पीठ पर कागज़ की मछली चिपकाकर यह मज़ाक करते हैं।
  • ब्रिटेन की परंपरा: ब्रिटेन और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में अप्रैल फूल के मज़ाक केवल दोपहर तक ही किए जाते हैं। दोपहर के बाद मज़ाक करने वाले को ही मूर्ख मान लिया जाता है।
ध्यान दें: इस दिन का मुख्य उद्देश्य हंसी और खुशी फैलाना है, इसलिए सलाह दी जाती है कि मज़ाक ऐसा हो जिससे किसी का दिल न दुखे

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