गोंधल क्या है? मराठी परंपरा से ऑस्कर तक

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  Gondhal Oscar 2027: मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनने के बाद महाराष्ट्र की एक पारंपरिक लोक-विधि भी चर्चा में आ गई है। आखिर गोंधल क्या है और इस परंपरा का फिल्म से क्या संबंध है? आइए समझते हैं। गोंधल आखिर होता क्या है? महाराष्ट्र में गोंधल एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान और लोक-प्रस्तुति है, जिसमें भक्ति, संगीत, गायन और नृत्य का मेल देखने को मिलता है। यह परंपरा कुछ परिवारों में कुलदेवता की पूजा और शुभ अवसरों से जुड़ी रही है। महाराष्ट्र के मराठी विश्वकोश के अनुसार, गोंधल देवी की स्तुति और पूजा से जुड़ा एक कुलाचार है। गोंधल की प्रस्तुति करने वाले कलाकारों को गोंधली कहा जाता है। पारंपरिक प्रस्तुति में देवी-देवताओं की स्तुति, लोकगीत, वाद्य संगीत और नृत्य शामिल होते हैं। शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी होती है यह परंपरा गोंधल का संबंध महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में विवाह और दूसरे मंगल अवसरों से रहा है। महाराष्ट्र सरकार के गजेटियर में भी इसका उल्लेख मिलता है कि शुभ अवसर के बाद देवी की पूजा और स्तुति के लिए गोंधल की प्रस्तुति की जाती थी। इस दौरान रात में संगीत और नृत्य ...

हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है

 


हर साल 1 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'अप्रैल फूल' (April Fool) या 'मूर्ख दिवस' मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मज़ाक (pranks) करते हैं और एक-दूसरे को 'बेवकूफ' बनाकर आनंद लेते हैं।

इसे मनाने के पीछे सबसे लोकप्रिय ऐतिहासिक कारण नीचे दिए गए हैं:
  • कैलेंडर में बदलाव (फ्रांस): 16वीं सदी (1564/1582) में फ्रांस ने जूलियन कैलेंडर की जगह ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया। इसके बाद नया साल 1 अप्रैल के बजाय 1 जनवरी से शुरू होने लगा। उस समय सूचना के अभाव में कई लोग 1 अप्रैल को ही नया साल मनाते रहे। ऐसे लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए उन्हें "अप्रैल फूल" कहा जाने लगा।
  • हिलारिया उत्सव (रोम): प्राचीन रोम में मार्च के अंत में 'हिलारिया' नाम का त्यौहार मनाया जाता था। इसमें लोग वेश बदलकर एक-दूसरे की नकल उतारते थे और हंसी-मज़ाक करते थे, जिसे अप्रैल फूल की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
  • अप्रैल फिश (April Fish): फ्रांस में जिस व्यक्ति को मूर्ख बनाया जाता है, उसे 'पोइज़न द एप्रिल' (अप्रैल फिश) कहा जाता है। बच्चे अक्सर लोगों की पीठ पर कागज़ की मछली चिपकाकर यह मज़ाक करते हैं।
  • ब्रिटेन की परंपरा: ब्रिटेन और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में अप्रैल फूल के मज़ाक केवल दोपहर तक ही किए जाते हैं। दोपहर के बाद मज़ाक करने वाले को ही मूर्ख मान लिया जाता है।
ध्यान दें: इस दिन का मुख्य उद्देश्य हंसी और खुशी फैलाना है, इसलिए सलाह दी जाती है कि मज़ाक ऐसा हो जिससे किसी का दिल न दुखे

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